श्री विश्वकर्मा प्रभु आरती
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ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा।
सृष्टि रचयिता तुम बिन, नहिं कोई और परमा॥
तुम सबके स्वामी हो, तुम ही हो पालक।
सृष्टि के रचयिता तुम, विश्व के रखवालक॥
शिल्प शास्त्र के जनक हो, यंत्र मंत्र के स्वामी।
सबके हृदय में बसे हो, तुम हो विश्वकर्मा जी॥
पंच तत्व के रचयिता, तुम हो आधार।
सूरज, चंद्र, तारे, बनाए तुमने संसार॥
वास्तु विद्या के तुम ही, एकमात्र आधार।
हर निर्माण में तुम बिन, अधूरी हर पुकार॥
देव, दानव, मानव सब, करते तुमको प्रणाम।
विश्वकर्मा भगवान की, जय जय हो सदा नाम॥
जो कोई आरती गावे, मनवांछित फल पावे।
श्री विश्वकर्मा की कृपा, सदा सुखी जीवन पावे॥