श्री दशावतार जी की आरती

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श्री दशावतार जी की आरती

जय दशावतार प्रभु, जय विष्णु भगवाना।

धर्म रक्षा हेतु तुम, धरे दस रूप सुजाना।।

जय दशावतार प्रभु...

मत्स्य रूप जल में धारा, कुरमा मंदर पर्वत धारा।

वराह रूप धरती रक्षा, हिरण्याक्ष को तुम संहारा।।

जय दशावतार प्रभु...

नरसिंह रूप भक्त तारा, प्रह्लाद के संकट हारा।

वामन रूप दानव मारा, बलि राज को पाताल डारा।।

जय दशावतार प्रभु...

परशुराम वीर बलवाना, क्षत्रिय दर्प तुमने हारा।

राम रूप रावण संहारा, सीता संग सुख संसारा।।

जय दशावतार प्रभु...

कृष्ण रूप कंस विदारा, गोवर्धन धर भक्त उबारा।

बुद्ध रूप करुणा सिखाई, कल्कि युग में पाप मिटाई।।

जय दशावतार प्रभु...

जो नर आरती गावे, प्रेम सहित मन लावे।

विष्णु कृपा सदा पावे, सुख समृद्धि घर छावे।।

जय दशावतार प्रभु…