संत कबीर दास जी की आरती

✦

आरती दीनदयाल साहेब आरती हो

आरती गरीब नवाज साहेब आरती हो

ज्ञान आधार विवेक की बाती,

सुरति जोत जहाँ जात, साहेब आरती हो।

आरती दीनदयाल, साहेब आरती हो।

सतगुरु सतनाम की सैर करावे,

सहज समाधि में लखावे, साहेब आरती हो।

आरती दीनदयाल, साहेब आरती हो।

साहस संशय निर्मूल कर दे,

अंतर में ज्योति भर दे, साहेब आरती हो।

आरती दीनदयाल, साहेब आरती हो।

कबीर कहे सुनो भाई साधो,

सतगुरु चरणों में पड़ो, साहेब आरती हो।

आरती दीनदयाल, साहेब आरती हो।