सतयुग कब आया और कब तक रहा? सत्य का युग विस्तार से जानिए
Siddharth Jain · 13 Oct 2025
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हिन्दू धर्म की समय-गणना के अनुसार ब्रह्माण्ड में समय चार युगों में विभाजित है — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। इन चारों युगों को मिलाकर एक महायुग कहा जाता है। सतयुग इन सबमें पहला और सबसे पवित्र युग माना गया है। इसे “कृतयुग” या “सत्य का युग” भी कहा जाता है क्योंकि इस काल में धर्म, सत्य और ईश्वर भक्ति अपने सर्वोच्च रूप में थे।
सतयुग की शुरुआत और अवधि:
शास्त्रों के अनुसार सतयुग की कुल अवधि 17,28,000 मानव वर्ष बताई गई है।
चारों युगों की अवधि इस प्रकार मानी जाती है:
सतयुग — 17,28,000 वर्ष
त्रेतायुग — 12,96,000 वर्ष
द्वापरयुग — 8,64,000 वर्ष
कलियुग — 4,32,000 वर्ष
चारों को मिलाकर एक महायुग होता है, जिसकी कुल अवधि 43,20,000 वर्ष होती है।
वर्तमान में हम कलियुग में हैं, जो 3102 ईसा पूर्व आरंभ हुआ था, जब भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी लोक से प्रस्थान किया।
इस गणना के अनुसार, सतयुग लगभग 39 लाख वर्ष पहले आरंभ हुआ था और 17,28,000 वर्ष तक चला।
सतयुग की विशेषताएँ:
सतयुग में धर्म अपने चारों पायों पर स्थिर था — सत्य, दया, तप और दान।
मनुष्य अत्यंत दीर्घायु, सत्यप्रिय, तपस्वी और शांतचित्त थे।
लालच, हिंसा, छल और असत्य का कोई स्थान नहीं था।
प्रकृति संतुलित थी और सभी जीवों में परस्पर सौहार्द था।
लोग योग और ध्यान के माध्यम से ईश्वर का साक्षात्कार करते थे।
धर्म और समाज की स्थिति:
इस युग में राजा, प्रजा, ऋषि-मुनि सभी धर्म के मार्ग पर चलते थे। कोई अन्याय या भेदभाव नहीं था।
सभी कर्म भगवान की उपासना के लिए किए जाते थे।
मनुष्य की आयु हज़ारों वर्षों की होती थी और उसका जीवन पूर्णतः सात्त्विक था।
सतयुग के अंत और त्रेतायुग की शुरुआत:
समय के साथ जब मानव में स्वार्थ और भोग की भावना बढ़ी, तब धर्म का एक पाय कम हुआ और त्रेतायुग आरंभ हुआ।
इस युग में मर्यादा और कर्म की प्रधानता बढ़ी और धीरे-धीरे युग परिवर्तन का चक्र आगे बढ़ता गया।
निष्कर्ष
सतयुग न केवल समय की दृष्टि से सबसे लंबा युग था, बल्कि यह आत्मिक रूप से भी सबसे उज्ज्वल काल था।
यह वह समय था जब मानव जीवन पूर्ण सत्य, धर्म और ईश्वर भक्ति पर आधारित था।
जैसे-जैसे युग बदलते गए, धर्म के पाय घटते गए, किंतु विश्वास यही है कि युग चक्र के अंत में फिर से सतयुग का आगमन होगा और सत्य की पुनर्स्थापना होगी।