पहले नवरात्रे का महत्व और नवरात्रे क्यों आते हैं?

Siddharth Jain · 21 Sept 2025

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हिंदू धर्म में वर्ष भर में दो मुख्य नवरात्रे आते हैं – चैत्र नवरात्रे और शारदीय नवरात्रे। ये पर्व माँ दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की उपासना के लिए माने जाते हैं। पहले दिन यानी प्रतिपदा से नवरात्र शुरू होते हैं, जिसे कलश स्थापना और माता शैलपुत्री की पूजा का दिन कहा गया है। पहले नवरात्रे में क्या करना चाहिए? कलश स्थापना (घटस्थापना): शुभ मुहूर्त में मिट्टी के बर्तन में जौ बोकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश के ऊपर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं। माता शैलपुत्री की पूजा: पहले नवरात्रे में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। लाल फूल, चंदन, धूप, दीपक और भोग अर्पित किया जाता है। व्रत और संकल्प: भक्त नवरात्रे के नौ दिनों तक उपवास या फलाहार करते हैं। शुद्ध मन, सात्विक भोजन और नियम का पालन आवश्यक है। जौ बोना: जौ बोने की परंपरा है जो नए जीवन और समृद्धि का प्रतीक है। नौ दिन बाद जब जौ अंकुरित होते हैं, तो उन्हें शुभ माना जाता है। पाठ और भजन: दुर्गा सप्तशती, देवी पाठ और भजन-कीर्तन करना अत्यंत फलदायी है। नवरात्रे क्यों आते हैं? ऋतु परिवर्तन का समय: नवरात्रे साल में दो बार आते हैं – चैत्र (मार्च- अप्रैल) और शारदीय (सितंबर-अक्टूबर)। यह समय ऋतु परिवर्तन का होता है, जब प्रकृति और शरीर दोनों को शुद्ध और संतुलित रखने की आवश्यकता होती है। आध्यात्मिक शुद्धि: नवरात्रे आत्मिक शक्ति और भक्ति के नौ दिन हैं। इन दिनों साधना, व्रत और पूजा से मन और शरीर दोनों को शुद्ध किया जाता है। माता दुर्गा की उपासना: नवरात्रे में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करके भक्त शक्ति, भक्ति और ज्ञान प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी समय माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए नवरात्रे को असुरों पर देवियों की विजय का पर्व भी माना जाता है। निष्कर्ष पहले नवरात्रे में कलश स्थापना, माता शैलपुत्री की पूजा, व्रत और पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। नवरात्रे केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं बल्कि शक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का समय है। इन्हीं नौ दिनों की साधना से मनुष्य को भक्ति, शक्ति और समृद्धि तीनों की प्राप्ति होती है।