जैन धर्म कब शुरू हुआ और किसने आरंभ किया?
Siddharth Jain · 7 Sept 2025
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जैन धर्म का परिचय
जैन धर्म भारत की सबसे प्राचीन धर्म परंपराओं में से एक है। इसका मूल सिद्धांत है — अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य। यह धर्म केवल ईश्वर की भक्ति पर आधारित नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताता है।
जैन धर्म कब शुरू हुआ?
जैन धर्म की शुरुआत का सटीक समय बताना कठिन है क्योंकि यह बहुत प्राचीन है।
ऐतिहासिक प्रमाणों और परंपराओं के अनुसार, जैन धर्म वैदिक धर्म से भी पहले से अस्तित्व में था।
जैन ग्रंथों के अनुसार, जैन धर्म शाश्वत (अनादि-अनंत) है यानी इसका कोई प्रारंभ या अंत नहीं है।
परंतु ऐतिहासिक रूप से 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में जैन धर्म को संगठित रूप देने वाले महान गुरु थे भगवान महावीर स्वामी।
किसने आरंभ किया जैन धर्म का?
जैन परंपरा के अनुसार, धर्म की शिक्षा तीर्थंकरों द्वारा दी जाती है।
कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं।
पहले तीर्थंकर थे ऋषभदेव (आदिनाथ), जिन्हें जैन धर्म का प्रथम उपदेशक माना जाता है।
अंतिम और 24वें तीर्थंकर थे भगवान महावीर स्वामी (599 ईसा पूर्व – 527 ईसा पूर्व), जिन्होंने जैन धर्म को एक नई दिशा और पहचान दी।
महावीर स्वामी का योगदान
उन्होंने कठोर तपस्या और साधना के बाद कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया।
उन्होंने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म बताया।
उन्होंने अनुयायियों को पाँच मुख्य व्रतों का पालन करने की शिक्षा दी —
अहिंसा (किसी को चोट न पहुँचाना)
सत्य (सत्य बोलना)
अस्तेय (चोरी न करना)
ब्रह्मचर्य (इंद्रिय संयम)
अपरिग्रह (संपत्ति का मोह न करना)
जैन धर्म का महत्व
जैन धर्म केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश फैलाता है।
इस धर्म ने भारतीय संस्कृति, साहित्य, कला और दर्शन पर गहरा प्रभाव डाला है।
निष्कर्ष
जैन धर्म की जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं और इसे अनादि माना गया है। ऐतिहासिक रूप से, इसका संगठित स्वरूप महावीर स्वामी ने दिया, जबकि प्रारंभिक शिक्षा पहले तीर्थंकर ऋषभदेव जी ने दी थी। यह धर्म आज भी अपने अनुयायियों को अहिंसा, आत्मसंयम और मोक्ष की ओर प्रेरित करता है।