दिवाली के बाद पड़वा क्या होता है और इसका क्या महत्व है
Siddharth Jain · 21 Oct 2025
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दिवाली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पड़वा या अन्नकूट पर्व कहा जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और अन्नकूट (विभिन्न प्रकार के व्यंजन) का भोग लगाते हैं। इसे नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है, विशेष रूप से व्यापारी वर्ग के लिए, क्योंकि इस दिन नए बही-खाते (लेजर) की शुरुआत करने की परंपरा है।
गोवर्धन पड़वा का इतिहास:
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, एक बार वृंदावन में इंद्र देवता की पूजा की परंपरा थी। भगवान कृष्ण ने गोपों को समझाया कि वर्षा गोवर्धन पर्वत की कृपा से होती है, न कि केवल इंद्र की।
गोपों ने इंद्र की बजाय गोवर्धन की पूजा की, जिससे इंद्र क्रोधित हुए और उन्होंने भारी वर्षा कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी को वर्षा से बचाया।
इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा की जाती है, जो प्रकृति के प्रति सम्मान और संतुलन का प्रतीक है।
गोवर्धन पड़वा कैसे मनाई जाती है:
सुबह स्नान और घर की शुद्धि करें।
घर के आंगन या मंदिर में गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाएं।
उसके चारों ओर फूल, चावल, दीप और मिठाई रखें।
विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर अन्नकूट के रूप में भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाएं।
“गोवर्धन पूजा” और “श्रीकृष्ण गोवर्धन लीलाय नमः” मंत्र का जाप करें।
पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें और प्रसाद वितरित करें।
क्या करना चाहिए:
इस दिन अन्नकूट का भोग लगाना और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना अत्यंत शुभ है।
गायों की सेवा करें, उन्हें हरा चारा खिलाएं।
नए कार्य या व्यवसाय की शुरुआत इस दिन करना शुभ माना जाता है।
बड़ों का आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करें।
क्या नहीं करना चाहिए:
इस दिन किसी से विवाद या क्रोध नहीं करना चाहिए।
भोजन का अपव्यय नहीं करें, क्योंकि यह दिन अन्न का सम्मान करने का प्रतीक है।
अमावस्या की नकारात्मकता से बचने के लिए घर में सफाई बनाए रखें और दीपक जलाए रखें।
पूजा से पहले बिना स्नान किए भोजन या अन्नकूट का प्रसाद न ग्रहण करें।
गोवर्धन पड़वा का महत्व:
यह पर्व प्रकृति, गाय और अन्न के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। भगवान कृष्ण का संदेश था कि हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और उसके उपकारों का सम्मान करना चाहिए।
गोवर्धन पूजा से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
यह दिन परिवार, आस्था और कृतज्ञता के भाव को गहराई से जोड़ता है।