छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है
Siddharth Jain · 18 Oct 2025
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छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है। यह पर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन आता है और इसका धार्मिक तथा आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। इस दिन भगवान कृष्ण, माता लक्ष्मी और यमराज की पूजा का विशेष विधान है।
छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है:
पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था, जिससे देवताओं और मनुष्यों को भय से मुक्ति मिली। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन प्रातःकाल स्नान, दीपदान और पूजन करता है, उसे यमराज के भय से मुक्ति मिलती है।
छोटी दिवाली कैसे मनाई जाती है:
इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसे “अभ्यंग स्नान” कहा जाता है, जो शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है।
संध्या समय घर के प्रत्येक कोने में दीपक जलाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन के दीपक नरक के अंधकार को दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
मुख्य द्वार, रसोईघर, तुलसी चौरा और धन स्थान पर दीप जलाना शुभ फल देता है।
क्या करना चाहिए:
प्रातःकाल स्नान से पहले शरीर पर तेल लगाकर अभ्यंग स्नान करें।
भगवान कृष्ण, यमराज और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
घर की सफाई करें और दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करें।
इस दिन किसी जरूरतमंद को वस्त्र, दीपक या अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या नहीं करना चाहिए:
छोटी दिवाली के दिन झगड़ा या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
कूड़ा-कचरा या गंदगी घर में नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
इस दिन तामसिक भोजन, शराब या मांस का सेवन वर्जित माना गया है।
रात्रि में घर के सभी दीप बुझाना अशुभ माना जाता है।
छोटी दिवाली का महत्व:
छोटी दिवाली न केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, बल्कि यह हमें आत्मशुद्धि और प्रकाश के महत्व की भी याद दिलाती है।
इस दिन दीप जलाना जीवन के अंधकार को दूर करने और मन में सकारात्मकता लाने का प्रतीक है।
यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जैसे प्रकाश अंधकार को मिटा देता है, वैसे ही ज्ञान और भक्ति हमारे जीवन के नकारात्मक विचारों को दूर करते हैं।