छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली में क्या अंतर है और दोनों क्यों मनाई जाती हैं?

Siddharth Jain · 13 Oct 2025

✦
दीवाली भारत का सबसे प्रमुख और आनंदमय त्योहार है। लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि दीवाली से एक दिन पहले आने वाली छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली के बीच क्या अंतर है और दोनों क्यों मनाई जाती हैं। हालांकि दोनों का उद्देश्य प्रकाश, पवित्रता और शुभता से जुड़ा है, लेकिन इनके पीछे अलग-अलग पौराणिक और धार्मिक कथाएँ हैं। छोटी दिवाली क्या है? छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, काली चौदस या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है, यानी बड़ी दिवाली से एक दिन पहले। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देवी काली और देवी लक्ष्मी की कृपा से राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने देवताओं और मनुष्यों को बहुत कष्ट दिया था। उसके वध के साथ ही संसार को भय और अधर्म से मुक्ति मिली। इसलिए छोटी दिवाली अंधकार और पाप के नाश का प्रतीक मानी जाती है। छोटी दिवाली की परंपराएँ: लोग सुबह जल्दी उठकर तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) करते हैं, जिसे पवित्र माना गया है। घरों में दीप जलाकर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की परंपरा है। इस दिन यमराज की पूजा भी की जाती है, ताकि अकाल मृत्यु का भय न रहे। कुछ स्थानों पर रूप-चौदस के रूप में इसे मनाया जाता है, जहाँ लोग शरीर और मन की शुद्धि का विशेष ध्यान रखते हैं। बड़ी दिवाली क्या है? बड़ी दिवाली को ही सामान्यतः दीपावली कहा जाता है। यह कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है — छोटी दिवाली के अगले दिन। इस दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे और अयोध्यावासियों ने दीपों से उनका स्वागत किया। इसी कारण इसे “प्रकाश पर्व” कहा जाता है। बड़ी दिवाली की विशेषताएँ: इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, और कुबेर जी की पूजा की जाती है। घरों को दीप, फूल, रंगोली और सजावट से सजाया जाता है। परिवारजन एक-दूसरे को शुभकामनाएँ और मिठाइयाँ बांटते हैं। यह दिन समृद्धि, धन, और शुभ आरंभ का प्रतीक है। छोटी और बड़ी दिवाली में मुख्य अंतर: पहलू छोटी दिवाली बड़ी दिवाली तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी कार्तिक अमावस्या अन्य नाम नरक चतुर्दशी, रूप चौदस दीपावली, लक्ष्मी पूजन पूजा के देवता यमराज, काली, कृष्ण लक्ष्मी, गणेश, कुबेर मुख्य उद्देश्य पाप और अंधकार का नाश प्रकाश, समृद्धि और शुभता का स्वागत पौराणिक घटना नरकासुर वध श्रीराम का अयोध्या आगमन निष्कर्ष छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही पर्व के दो महत्वपूर्ण चरण हैं। छोटी दिवाली हमें सिखाती है कि पहले भीतर और बाहर के अंधकार को मिटाना आवश्यक है, तभी बड़ी दिवाली पर सच्चे अर्थों में प्रकाश फैलाया जा सकता है। यही कारण है कि पहले नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) मनाकर नकारात्मकता को दूर किया जाता है, और अगले दिन दीपावली पर भगवान की कृपा और सुख-समृद्धि का स्वागत किया जाता है।