बृहस्पति वार (गुरुवार) का महत्व और पूजन विधि

Siddharth Jain · 4 Sept 2025

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बृहस्पति वार का महत्व हिंदू धर्म में सप्ताह का पाँचवा दिन गुरुवार या बृहस्पति वार कहलाता है। यह दिन विशेष रूप से बृहस्पति देव (गुरु ग्रह) और भगवान विष्णु को समर्पित है। बृहस्पति देव को देवताओं का गुरु कहा गया है। वे ज्ञान, धर्म, भक्ति, विवाह, संतान सुख और समृद्धि के कारक माने जाते हैं। गुरुवार को व्रत, पूजा और दान करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सुख-शांति, वैवाहिक आनंद तथा धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। बृहस्पति देव कौन हैं? पुराणों के अनुसार, बृहस्पति देव अंगिरस ऋषि के पुत्र हैं और इंद्र सहित सभी देवताओं के आचार्य (गुरु) हैं। वे वेद, शास्त्र और ज्योतिष के ज्ञाता माने जाते हैं। गुरु ग्रह को सबसे शुभ ग्रह माना गया है। बृहस्पति वार व्रत क्यों रखा जाता है? गुरु ग्रह की कृपा पाने के लिए। वैवाहिक जीवन की समस्याओं के निवारण हेतु। धन और संतान सुख की प्राप्ति के लिए। ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए। गुरुवार को क्या करना चाहिए? प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें। पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, गुड़ और केले का भोग लगाएँ। केले के पेड़ की पूजा करें और जल चढ़ाएँ। व्रत रखने वाले भक्त नमक रहित पीले भोजन करें। गुरुवार को क्या नहीं करना चाहिए? बाल कटवाना, नाखून काटना और दाढ़ी बनवाना वर्जित है। काले और नीले रंग के वस्त्र न पहनें। मांसाहार और शराब का सेवन न करें। झगड़ा और कटु वचन बोलने से बचें। बृहस्पति वार कथा (संक्षेप में) एक समय की बात है, एक स्त्री हर गुरुवार को व्रत रखती थी। उसकी पड़ोसन ने जलनवश उसे भ्रमित कर दिया कि व्रत का कोई लाभ नहीं होता। उसने व्रत तोड़ दिया और धीरे-धीरे उसके घर से सुख-समृद्धि और शांति चली गई। बाद में जब उसने गुरु वार व्रत की महिमा जानी, तो पुनः व्रत आरंभ किया और उसका जीवन खुशहाल हो गया। निष्कर्ष बृहस्पति वार का व्रत और पूजा केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत फलदायी है। यह व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में विवाह संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं, संतान सुख मिलता है और धन-समृद्धि बढ़ती है। जो भी भक्त श्रद्धा और नियम से बृहस्पति वार का पालन करते हैं, उन पर सदैव गुरु देव और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।