भाई दूज कैसे मनाया जाए और इसका महत्व

Siddharth Jain · 22 Oct 2025

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भाई दूज का पर्व हिंदू धर्म में भाई और बहन के प्रेम, सम्मान और एकता का प्रतीक माना जाता है। यह दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज का आरंभ यमराज और उनकी बहन यमी (यमुना) की कथा से हुआ था। कहा जाता है कि एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना ने उनका तिलक किया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। यमराज इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने अपनी बहन को यह वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाएगा और तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा। तभी से भाई दूज का त्योहार मनाया जाने लगा। भाई दूज का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक भी है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है। इस दिन बहनें सुबह स्नान करके पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में रोली, चावल, दीपक, मिठाई और नारियल रखा जाता है। भाई को आसन पर बैठाकर बहन उसके माथे पर तिलक करती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार, वस्त्र या धन देकर आशीर्वाद लेता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्योहार बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। कई जगह बहनें अपने भाइयों के घर जाती हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं। शहरी क्षेत्रों में भी यह पर्व आधुनिक ढंग से मनाया जाता है — भाई बहन एक-दूसरे से मिलते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं। भाई दूज प्रेम, स्नेह और कर्तव्य की भावना का संदेश देता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट ही जीवन का असली आनंद है। भाई दूज का उत्सव भले ही एक दिन के लिए हो, पर इसका संदेश पूरे जीवन के लिए प्रेरणा बन जाता है — कि भाई अपनी बहन की रक्षा करे और बहन उसके जीवन में शुभता का संचार करती रहे।