भगवान नारायण जी कौन हैं

Siddharth Jain · 11 Oct 2025

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भगवान नारायण हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में जाना जाता है। त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — में विष्णु जी को ही नारायण कहा गया है। जहाँ ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण करते हैं, वहीं नारायण उसका पालन-पोषण करते हैं, और महादेव शिव उसका संहार करते हैं। पुराणों के अनुसार, भगवान नारायण सृष्टि की आद्य शक्ति हैं। वे क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर विराजमान रहते हैं। उनके साथ माता लक्ष्मी जी, जो धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं, सदा उपस्थित रहती हैं। विष्णु जी के चार हाथ हैं — जिनमें वे शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं। ये चारों वस्तुएँ धर्म, नीति, शक्ति और ज्ञान का प्रतीक हैं। भगवान नारायण ने समय-समय पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश किया। उनके प्रमुख अवतारों में राम अवतार, कृष्ण अवतार, नरसिंह अवतार, वामन अवतार, और कूर्म अवतार आदि शामिल हैं। श्रीमद्भागवत और विष्णु पुराण में नारायण जी की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ‘नार’ का अर्थ होता है जीव या प्राणी, और ‘आयन’ का अर्थ होता है आश्रय या स्थान। इस प्रकार नारायण का अर्थ है — “जो समस्त जीवों का आश्रय हैं।” भगवान विष्णु को ही समस्त सृष्टि का आधार और पालनकर्ता माना गया है। नारायण जी की उपासना से मनुष्य के जीवन में शांति, स्थिरता और धर्मपरायणता आती है। उनकी भक्ति करने से व्यक्ति के मन में करुणा, प्रेम और कर्तव्यबोध का भाव उत्पन्न होता है। संक्षेप में, भगवान नारायण जी वह दिव्य शक्ति हैं जो सृष्टि के हर कण में विद्यमान हैं और जो संसार को धर्म और संतुलन के मार्ग पर बनाए रखते हैं।