अष्टमी नवरात्रि में क्या करना चाहिए

Siddharth Jain · 30 Sept 2025

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नवरात्रि के नौ दिनों में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन को महाअष्टमी कहा जाता है और इसे देवी दुर्गा की आराधना का सर्वोच्च दिन माना जाता है। भक्तजन इस दिन देवी महागौरी की पूजा करते हैं और कन्या पूजन (कंजक) का आयोजन करते हैं। मान्यता है कि अष्टमी की पूजा और व्रत से साधक को मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। १. प्रातःकाल की तैयारी अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थान पर देवी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। २. देवी महागौरी की पूजा महागौरी जी को श्वेत वस्त्र और श्वेत पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। दुर्गा सप्तशती, देवी स्तुति और “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप करें। दीपक और धूप जलाकर माता की आराधना करें। ३. हवन और दुर्गा सप्तशती पाठ अष्टमी पर हवन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसमें गाय के घी, कपूर और हवन सामग्री अर्पित की जाती है। साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ४. कन्या पूजन (कंजक पूजा) अष्टमी पर 7, 9 या 11 छोटी कन्याओं को घर आमंत्रित किया जाता है। उनके चरण धोकर सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाया जाता है। उन्हें पूड़ी, हलवा और चने का प्रसाद खिलाया जाता है। दक्षिणा, चुनरी और उपहार देकर उन्हें विदा किया जाता है। मान्यता है कि कन्याएँ स्वयं देवी का स्वरूप होती हैं, इसलिए उनकी सेवा और पूजा से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। ५. व्रत और संकल्प जो भक्त नवरात्रि का व्रत रखते हैं, वे इस दिन व्रत का विशेष पालन करते हैं। अष्टमी पर व्रत का फल अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। दिनभर सात्त्विक आहार लें और आलस्य से दूर रहकर भक्ति में समय बिताएँ। ६. दान और सेवा अष्टमी के दिन दान करना भी बहुत शुभ माना गया है। गरीबों को भोजन कराना, वस्त्र दान करना और गौसेवा करना अत्यंत पुण्यकारी है। यह माना जाता है कि दान करने से देवी की कृपा तुरंत प्राप्त होती है। निष्कर्ष नवरात्रि की अष्टमी तिथि देवी महागौरी की आराधना का विशेष अवसर है। इस दिन की गई पूजा, हवन, कन्या पूजन और दान का महत्व अपार है। श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से भक्त को मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन से दुख, संकट और भय दूर हो जाते हैं।